रविवार, 5 मई 2013
तीन चौथाई: तीन चौथाई साहित्य संसार
तीन चौथाई: तीन चौथाई साहित्य संसार: ‘सरस्वती’ के संपादक का पुण्य स्मरण संपादक प्रवर महावीर प्रसाद द्विवेदी की 150वीं जयंती के समारोह 9 मई से शुरू हो रहे हैं। इस महा...
शनिवार, 20 अप्रैल 2013
तीन चौथाई: तीन चौथाई ज्ञान-विज्ञान
तीन चौथाई: तीन चौथाई ज्ञान-विज्ञान: बहुत दिलचस्प है भारतीय रेल के विकास की कहानी
16 अप्रैल को भारतीय रेल ने अपने 160 साल पूरे कर लिये हैं. 16 अप्रैल 1853 को पहली यात्री ट्रेन भारतीय उपमहाद्वीप में चली. इस ट्रेन ने अपने पहले सफर में 21 मील की दूरी तय की. इस सफर की शुरु आत बांबे से ठाणे के लिए हुई. इस ट्रेन को बोरीबंदर से 3:30 बजे दोपहर बाद ठाणे के लिए रवाना किया गया था. यह भारत के इतिहास की बेहद अहम व महत्वपूर्ण घटना थी...
रविवार, 31 मार्च 2013
तीन चौथाई: तीन चौथाई साहित्य संसार
तीन चौथाई: तीन चौथाई साहित्य संसार: राहुल सांकृत्यायन की तिब्बती पांडुलिपियों के अनुवाद का रास्ता साफ महापंडित राहुल सांकृत्यायन द्वारा तिब्बत से लाई गई छह हजार से अध...
तीन चौथाई: तीन चौथाई साहित्य संसार
तीन चौथाई: तीन चौथाई साहित्य संसार:
एक उपन्यासकार, जो अफ्रीकी अस्मिता की जुबान बन गया
एक उपन्यासकार, जो अफ्रीकी अस्मिता की जुबान बन गया
इसी 21 मार्च को अफ्रीका के महानतम उपन्यासकार चिनुआ अचीबे का निधन हो गया। चिनुआ अचीबे को आधुनिक अफ्रीकी साहित्य का पिता कहा जाता है। अफ्रीका की उपनिवेशवाद से मुठभेड़ के अनुभवों को प्रामाणिकता और संवेदनशीलता के साथ दर्ज करने की वजह से उन्हें आधुनिक विश्व साहित्य में सर्वाधिक सम्मानित लेखकों में शुमार किया जाता है...
मंगलवार, 26 मार्च 2013
तीन चौथाई: तीन चौथाई अपनों की दुनिया
तीन चौथाई: तीन चौथाई अपनों की दुनिया: कैसे कहें कि होली है... ए. दुष्यंत युवा कवि व पत्रकार। घी-तेल सब कुछ है महंगा, खाली अपनी झोली है, ऊपर से ये मार्च महीना, कैसे कहें ...
तीन चौथाई: तीन चौथाई काव्य संसार
तीन चौथाई: तीन चौथाई काव्य संसार:
जी करता है इस होली एक ऐसा रंग बनाऊं,
मन का दाग रहे न बाकी, चाहे जिसे लगाऊं।
मन से हटे तिमिर का डेरा, उदित हो नव सवेरा।
पापी ही पातक को मारे, दीन-दुखियन का भाग्य संवारे।
मोह-माया के तोड़ के बंधन, दूर करे वह सबका क्रंदन।
लोभ-लालच का हटे बसेरा, ऐसी होली गाऊं।
जी करता है इस होली में एक ऐसा रंग बनाऊं,
मन का दाग रहे न बाकी, चाहे जिसे लगाऊं।
दानव को भी देव बनाये, रूठे को गले लगाये।
जीवन पथ पर बने वह साथी, जैसे दिया और बाती।
दावानल में हिमशिखर बन, शीतल करे सबका मन।
आलोकित हो जीवन-पथ, ऐसा छंद सुनाऊं।
जी करता है इस होली में एक ऐसा रंग बनाऊं,
मन का दाग रहे न बाकी, चाहे जिसे लगाऊं....
होली मुबारक!
जी करता है इस होली एक ऐसा रंग बनाऊं, मन का दाग रहे न बाकी, चाहे जिसे लगाऊं।
मन से हटे तिमिर का डेरा, उदित हो नव सवेरा।
पापी ही पातक को मारे, दीन-दुखियन का भाग्य संवारे।
मोह-माया के तोड़ के बंधन, दूर करे वह सबका क्रंदन।
लोभ-लालच का हटे बसेरा, ऐसी होली गाऊं।
जी करता है इस होली में एक ऐसा रंग बनाऊं,
मन का दाग रहे न बाकी, चाहे जिसे लगाऊं।
दानव को भी देव बनाये, रूठे को गले लगाये।
जीवन पथ पर बने वह साथी, जैसे दिया और बाती।
दावानल में हिमशिखर बन, शीतल करे सबका मन।
आलोकित हो जीवन-पथ, ऐसा छंद सुनाऊं।
जी करता है इस होली में एक ऐसा रंग बनाऊं,
मन का दाग रहे न बाकी, चाहे जिसे लगाऊं....
रविवार, 27 जनवरी 2013
तीन चौथाई: देशकाल
तीन चौथाई: देशकाल: डरो ‘भगवान’, अपने अस्तित्व के लिए डरो! (भाग-4)
दरअसल, व्यवस्था बनती तो है समाज में स्वस्थ माहौल पैदा करने तथा विकास को गति देने के लिए, लेकिन बंद कमरों में बनने वाली नीतियां इतनी अव्यावहारिक हो जाती हैं कि यर्थाथ के धरातल पर उनमें कई छेद पैदा हो जाते हैं। इन्हीं छेदों के माध्यम से नीतियों और योजनाओं का रिसना शुरू हो जाता है और शत-प्रतिशत लाभ के हकदार आम जनता के पास लाभ की चूरन-चटनी से ज्यादा कुछ भी नहीं पहुंच पाता।
दरअसल, व्यवस्था बनती तो है समाज में स्वस्थ माहौल पैदा करने तथा विकास को गति देने के लिए, लेकिन बंद कमरों में बनने वाली नीतियां इतनी अव्यावहारिक हो जाती हैं कि यर्थाथ के धरातल पर उनमें कई छेद पैदा हो जाते हैं। इन्हीं छेदों के माध्यम से नीतियों और योजनाओं का रिसना शुरू हो जाता है और शत-प्रतिशत लाभ के हकदार आम जनता के पास लाभ की चूरन-चटनी से ज्यादा कुछ भी नहीं पहुंच पाता।
मंगलवार, 1 जनवरी 2013
तीन चौथाई: काव्य संसार
तीन चौथाई: काव्य संसार:
कैसे कहें नव वर्ष मंगलमय हो!
बिटिया को सुबह विदा करते जहां पिता का रूह कांपे शाम तक अपशुकुन की आशंका रहे जहां चांपे मर-मर कर ...
कैसे कहें नव वर्ष मंगलमय हो!
बिटिया को सुबह विदा करते जहां पिता का रूह कांपे शाम तक अपशुकुन की आशंका रहे जहां चांपे मर-मर कर ...
रविवार, 30 दिसंबर 2012
तीन चौथाई: काव्य संसार
तीन चौथाई: काव्य संसार: वे सुनते नहीं या समझ नहीं पाते कुछ सवाल फिर जहन में हैं सरकार को हम चुनते हैं हमीं उनके भाग्य विधाता होते हैं। सरकार भी यद...
शनिवार, 29 दिसंबर 2012
तीन चौथाई: देशकाल
तीन चौथाई: देशकाल: देश की जांबाज बेटी दामिनी, माफ करना दामिनी, मौत ने तुम्हें भले ही मात दे दी, लेकिन तुम्हारे संघर्ष ने देश के सवा अरब लोगों के दिलों ...
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