सोमवार, 19 नवंबर 2012
तीन चौथाई: स्मृति की रेखाएं
तीन चौथाई: स्मृति की रेखाएं: पुराने दिन लौटा दो छठी मइया... कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाये...जल्दी-जल्दी उग हो सूरूज बाबा... के तान सुन दिल व्याकुल हो रहा ह...
गुरुवार, 8 नवंबर 2012
तीन चौथाई: गुदगुदी
तीन चौथाई: गुदगुदी: महिला महाविद्यालय की शिक्षिका ने एक छात्रा से पूछा- नारी का क्या मतलब होता है? छात्राः शक्ति। शिक्षिकाः और पुरुष का? छात्राः सहनशक्ति...
शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2012
तीन चौथाई: देशकाल
तीन चौथाई: देशकाल: शास्त्रीजी की खुदकुशी और व्यवस्था की रक्तपिपासा
अजब झारखंड की गजब कहानी- 5
....आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जिस व्यक्ति ने कोल्हान ही नहीं बल्कि पूरे झारखंड के नेताओं को भेदभाव भुलाकर पृथक झारखंड के लिए एक मंच पर ला खड़ा किया उनकी मृत्यु स्वभाविक नहीं थी। उन्होंने खुदकुशी की। इसके पहले उन्होंने एक सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें लिखा कि वे किसी पर बोझ नहीं बनना चाहते। उनकी मृत्यु के बाद उनके शव को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों को शोध के लिए दान में सौंप दिया जाए।
अजब झारखंड की गजब कहानी- 5
....आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जिस व्यक्ति ने कोल्हान ही नहीं बल्कि पूरे झारखंड के नेताओं को भेदभाव भुलाकर पृथक झारखंड के लिए एक मंच पर ला खड़ा किया उनकी मृत्यु स्वभाविक नहीं थी। उन्होंने खुदकुशी की। इसके पहले उन्होंने एक सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें लिखा कि वे किसी पर बोझ नहीं बनना चाहते। उनकी मृत्यु के बाद उनके शव को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों को शोध के लिए दान में सौंप दिया जाए।
दरअसल,
प्रदेश की लकवाग्रस्त व्यवस्था का उनके जीवन पर बोझ इतना भारी हो गया था
कि वह उस बोझ के साथ अपना भार किसी अन्य पर डालना नहीं चाहते थे।
गुरुवार, 18 अक्टूबर 2012
तीन चौथाई: काव्य संसार
तीन चौथाई: काव्य संसार:
युद्ध
दिल और दिमाग के बीच
हमेशा
युद्ध चलता रहता है।
दिल पूछता है
इन अच्छे लोगों के साथ
कभी अच्छा क्यों ...
युद्ध
दिल और दिमाग के बीच
हमेशा
युद्ध चलता रहता है।
दिल पूछता है
इन अच्छे लोगों के साथ
कभी अच्छा क्यों ...
बुधवार, 26 सितंबर 2012
तीन चौथाई: देशकाल
तीन चौथाई: देशकाल: अजब झारखंड की गजब कहानी- 4
डैम, विस्थापन, पुनर्वास, दिकू, जल, जंगल, जमीन, सीआरपीएफ कैंप, रोजगार, माइंस, क्रशर, प्रदूषण, विकिरण...मुद्दे कई हैं। ग्रामीणों के लिए भी और उनके नुमाइंदों के लिए
भी। ग्रामीण इन मुद्दों का हल चाहते हैं और नुमाइंदे इन पर बल।
ऐसा नहीं कि ये मुद्दे स्थानीय हैं। बल्कि, हकीकत तो यह है कि ये मुद्दे स्थानीय होते हुए भी प्रदेश से लेकर दिल्ली
तक की रजानीति के द्वार खोलते हैं। आजादी के बाद इन मुद्दों ने कई लोगों को राज्य
से लेकर दिल्ली तक की गद्दी नसीब करा दी लेकिन, कुबेर के आशीर्वाद से इनमें रत्ती भर की कमी नहीं आई। आजादी से पहले भी
यहां मुद्दे यही थे और आज पैंसठ साल बाद भी यही हैं...
तीन चौथाई: देशकाल
तीन चौथाई: देशकाल: अजब झारखंड की गजब कहानी- 4
डैम, विस्थापन, पुनर्वास, दिकू, जल, जंगल, जमीन, सीआरपीएफ कैंप, रोजगार, माइंस, क्रशर, प्रदूषण, विकिरण...मुद्दे कई हैं। ग्रामीणों के लिए भी और उनके नुमाइंदों के लिए
भी। ग्रामीण इन मुद्दों का हल चाहते हैं और नुमाइंदे इन पर बल।
ऐसा नहीं कि ये मुद्दे स्थानीय हैं। बल्कि, हकीकत तो यह है कि ये मुद्दे स्थानीय होते हुए भी प्रदेश से लेकर दिल्ली
तक की रजानीति के द्वार खोलते हैं। आजादी के बाद इन मुद्दों ने कई लोगों को राज्य
से लेकर दिल्ली तक की गद्दी नसीब करा दी लेकिन, कुबेर के आशीर्वाद से इनमें रत्ती भर की कमी नहीं आई। आजादी से पहले भी
यहां मुद्दे यही थे और आज पैंसठ साल बाद भी यही हैं।
मंगलवार, 25 सितंबर 2012
तीन चौथाई: देशकाल
तीन चौथाई: देशकाल: अजब झारखंड की गजब कहानी-3 गरीबों की जाति नहीं होती। गरीबी अपने आप में एक बड़ा धर्म है। आज कलियुग का दौर है। संस्कृत में एक प्रस...
शनिवार, 15 सितंबर 2012
तीन चौथाई: देशकाल
तीन चौथाई: देशकाल: अजब झारखंड की गजब कहानी-2 आबुआ दिशोम, आबुआ राज। हर आदिवासी की जुबां पर यह नारा जिसका मतलब अपना राज्य और अपना राज होता है मिल जा...
शुक्रवार, 7 सितंबर 2012
तीन चौथाई: देशकाल
तीन चौथाई: देशकाल: अजब झारखंड की गजब कहानी-1 झारखंड अपने आप में अजब है और यहां की राजनीति गजब। यहां के मेहनती लोगों की जीवटता सारंडा की उन सात सौ पहाड़िय...
गुरुवार, 30 अगस्त 2012
तीन चौथाई: देशकाल
तीन चौथाई: देशकाल: मोदी का बयान और लिजलिजी राजनीति "मध्यमवर्गीयी परिवार की लड़कियां स्वास्थ्य से ज्यादा सुंदरता पर ध्यान देती हैं।" गुजरात के...
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