तीन चौथाई: काव्य संसार: कवि मन
जंगल में लोकतंत्र
बधाई हो ! जंगल में लोकतंत्र आ गया
शेर को पदच्युत कर बंदर सत्ता पा गया।
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शनिवार, 24 दिसंबर 2011
शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011
तीन चौथाई: काव्य संसार
तीन चौथाई: काव्य संसार: सौदागर
कवि मन
सियासी बाजार में सौदागर आने लगे हैं
खुली आंखों सपने दिखाने लगे हैं।
गर...
कवि मन
सियासी बाजार में सौदागर आने लगे हैं
खुली आंखों सपने दिखाने लगे हैं।
गर...
मंगलवार, 13 दिसंबर 2011
तीन चौथाई: काव्य संसार
तीन चौथाई: काव्य संसार: पांच वर्ष
कवि मन
कलुआ अब बड़े काम का हो गया है ,
धतूरा मत कहो उसे ,
बादाम हो गया है।
जब...
कवि मन
कलुआ अब बड़े काम का हो गया है ,
धतूरा मत कहो उसे ,
बादाम हो गया है।
जब...
तीन चौथाई: काव्य संसार
तीन चौथाई: काव्य संसार: पांच वर्ष
कवि मन
कलुआ अब बड़े काम का हो गया है ,
धतूरा मत कहो उसे ,
बादाम हो गया है।
जब...
कवि मन
कलुआ अब बड़े काम का हो गया है ,
धतूरा मत कहो उसे ,
बादाम हो गया है।
जब...
मंगलवार, 22 नवंबर 2011
तीन चौथाई: अपनों की दुनिया
तीन चौथाई: अपनों की दुनिया: पत्थर हो गया
साहिल था अब आंसुओं का समंदर हो गया ,
ए. दुष्यंत युवा कवि व पत्रकार।
इस पत्थर के शहर में मैं भी पत्थर ह...
साहिल था अब आंसुओं का समंदर हो गया ,
ए. दुष्यंत युवा कवि व पत्रकार।
इस पत्थर के शहर में मैं भी पत्थर ह...
बुधवार, 16 नवंबर 2011
तीन चौथाई: काव्य संसार
तीन चौथाई: काव्य संसार: फेंटो
फेंटो और फेंटो
खूब फेंटो
एक-एक पत्ते फेंट डालो
कवि मन
विश्वास नहीं है तुम पर
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फेंटो और फेंटो
खूब फेंटो
एक-एक पत्ते फेंट डालो
कवि मन
विश्वास नहीं है तुम पर
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मंगलवार, 1 नवंबर 2011
तीन चौथाई: चित्र संसार
तीन चौथाई: चित्र संसार: ये तस्वीरें दिल्ली के लालकिला स्थित संग्रहालय से ली गई हैं। कुछ तस्वीरें आगरा की भी हैं।
बात उन दिनों की है जब हम मेरठ ...
बात उन दिनों की है जब हम मेरठ ...
सोमवार, 31 अक्टूबर 2011
तीन चौथाई: काव्य संसार
तीन चौथाई: काव्य संसार: आंसू
कवि मन
गजब मजबूत है रिश्ता मेरा और इन आंसुओं का। सब छोड़ देते हैं साथ जब उस वक्त भी यह अपना फर्ज निभाता है। अपनों ...
कवि मन
गजब मजबूत है रिश्ता मेरा और इन आंसुओं का। सब छोड़ देते हैं साथ जब उस वक्त भी यह अपना फर्ज निभाता है। अपनों ...
मंगलवार, 25 अक्टूबर 2011
तीन चौथाई: काव्य संसार
तीन चौथाई: काव्य संसार: रिश्ते
कवि मन
रिश्तों के बाजार में बिकते थे कुछ महंगे और कुछ सस्ते रिश्ते और साथ में बिकतीं थीं कुछ योग्यताएं और सौदा क...
कवि मन
रिश्तों के बाजार में बिकते थे कुछ महंगे और कुछ सस्ते रिश्ते और साथ में बिकतीं थीं कुछ योग्यताएं और सौदा क...
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