बुधवार, 16 नवंबर 2011

मंगलवार, 1 नवंबर 2011

तीन चौथाई: चित्र संसार

तीन चौथाई: चित्र संसार: ये तस्वीरें दिल्ली के लालकिला स्थित संग्रहालय से ली गई हैं। कुछ तस्वीरें आगरा की भी हैं।

बात उन दिनों की है जब हम मेरठ ...

मंगलवार, 25 अक्टूबर 2011

तीन चौथाई: काव्य संसार

तीन चौथाई: काव्य संसार: रिश्ते

कवि मन
रिश्तों के बाजार में बिकते थे कुछ महंगे और कुछ सस्ते रिश्ते और साथ में बिकतीं थीं कुछ योग्यताएं और सौदा क...

गुरुवार, 20 अक्टूबर 2011

तीन चौथाई: काव्य संसार

तीन चौथाई: काव्य संसार: कवि मन
भूल अकेलेपन की ऊब से पैदा होती हैं कुछ बातें। कुछ दरकते रिश्तों के बचाने की तो कुछ नए रिश्ते बनाने की। नये ...

बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

तीन चौथाई: देशकाल

तीन चौथाई: देशकाल: भ्रष्टाचार बनाम बाजार बनाम भीड़ ‘ अरे जाओ-जाओ बहुत देखे तम्हारे जैसे। आज तक किसी नेता को जेल जाते या सजा होते सुना है। नहीं न। हम नेता हैं...

मंगलवार, 18 अक्टूबर 2011

तीन चौथाई: चटकारा

तीन चौथाई: चटकारा: चॉकलेट लड्डू सामग्री मिल्क पाउडरः 16 चम्मच कोको पाउडरः चार चम्मच बटरः तीन चम्मच पानीः आधा कप वनीला एसेंसः एक बनाने की विधि ...

तीन चौथाई: काव्य संसार

तीन चौथाई: काव्य संसार: उग्रता

कवि मन
रहता था मैं कभी अपनों से अपनों के बीच घिरा हुआ। क्योंकि , सुनता था सबकी बातें चुप रहकर , चाहे वह सत्युक्त हों या सत्...

बुधवार, 12 अक्टूबर 2011

जोंक

कवि मन
जानते हैं आप
जोंक के बारे में
देखा भी होगा।
कितनी बार खेतों में
कीचड़ में, 
कभी-कभी सड़क पर भी
रेंगते हुए...। 
जमाना बदल गया है
जोंक गांव से निकलकर
शहरों में आ बसे हैं
बड़े-बड़े दफ्तरों में। 
उनके पैर निकल आए हैं
कभी-कभी दौड़ते भी हैं
लेकिन
तब
जब उन्हें किसी से चिपकना होता है। 
चाहे कुर्सी से
या कुर्सी बनाने वाले से।
उनके पिलपिले शरीर में
सिर और चेहरे ने
आकार ले लिया है। 
सरकते हैं,  खिसकते हैं
पर सीट के इर्दगिर्द। 
जो नहीं बदल पाया
उनके साथ वह है नमक
का रिश्ता
जैसे ही नमक की बात आती है
वो तड़पते हैं
बेहद दर्द के साथ
और संपर्क में आते ही तोड़ देते हैं दम
पहले की तरह।